इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शादीशुदा हैं तो क्या हुआ, बेटी को भी मिल सकती है अनुकंपा नौकरी
Allahabad High Court On Compassionate Appointment: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा पर नौकरी को लेकर बड़ा फैसला सुनावाया है. कोर्ट के इस फैसले ने सैकड़ों-हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है. फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी बेटी को केवल उसके शादीशुदा होने के आधार पर अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली सरकारी नौकरी से वंचित या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. दरअसल, कोर्ट सहारनपुर की रहने वाली मनीषा त्यागी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. कोर्ट ने अपने फैसले में बेसिक शिक्षा अधिकारी के फैसले को निरस्त कर दिया है.
मनीषा के पिता धर्मवीर सिंह एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे. दुर्भाग्यवश, 14 मई 2015 को सेवाकाल के दौरान ही उनका निधन हो गया था. इसके बाद मनीषा त्यागी ने 17 मई 2016 को नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. हालांकि, सहारनपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 14 नवंबर 2024 को उनके आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह शादीशुदा हैं. इस मनमाने आदेश के खिलाफ मनीषा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
